वचन दिया तो खड़ा रहा कर्ण सा ना कोई योद्धा है,
सारा जीवन तन्हा _तन्हा,
कोई ना अपना रिश्ता है
हे कर्ण तुम्हारे हिस्से में ही
जीवन की कई परीक्षा हैं।
भगवान कहूं कैसे मैं तुमको
रण में, अर्जुन के केवल हो लिए
हे माधव अब तुम्हीं कहो
मुझसे क्यों छल किए।
महाभारत सा युद्व, नहीं कर्ण सा ना कोई योद्धा था
महाभारत की गाथा में, कहा किसी से डरता था
निष्ठा का हुंकार भरा, वचन दिया तो खड़ा रहा
ना जीवन से ना माधव को कहा किसी को छलता हूं ।
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मर्यादा की लाज बचाने, मेरी मां ने मुझको छोड़ा है
कितने अभागे हो,कर्ण तुम, यह कह,
सारे जगत ने मुझको छेड़ा है,
माता का मैं रूप ना देखा, प्रेम विवशता देखी है।
"हे माधव अब तुम्हीं कहो, कर्ण कम कहा है शास्त्रों में "
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रास ना आई इस जीवन को, तुमने जो अभिश्राप दिया
कितने ही धारे में बह गए , तुमने गंगा में फेक दिया
कुंती पुत्र कहूं कैसे, जब सूत ने मुझको पाला है
हे सूर्य देव , तुमने भी मुझको, कब कहा संभाला है।
रणभूमि में केशव को स्वयं मुझको छलते देखा है
केशव इस धरा पे हमने,
तेरे हर रूप का दर्शन ख़ूब किया
हे माधव अब तुम्हीं कहो कर्ण कम कहा है शास्त्रों में।
हनुमंत स्वयं रथ पर थे, केशव तुम सारथी थे
मैं अकेला रण में , अर्जुन को तेरे हरा देते
हे मुरली वाले नहीं छलते तो पार्थ को तेरे हरा देते
अर्जुन का शीश गिराकरके , तुमको भेंट चढ़ा देते।
Author:_
प्रीति कुमारी
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